हिमगिरि न्यूज — ऋषिकेश की यह घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। उस मां-बेटी की आत्मा को ईश्वर शांति प्रदान करे और उनके शोकाकुल परिवार को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति दे।
आज हमारी चिंता और गुस्सा पूरी तरह से स्वाभाविक और जायज है। जब आम जनता से समय पर बिजली का बिल वसूला जाता है, तो बदले में उन्हें सुरक्षित और सुचारू सेवाएं देना बिजली विभाग (ऊर्जा निगम) की प्राथमिक जिम्मेदारी बनती है।
इस प्रकार के हादसों में बिजली विभाग पर निम्नलिखित मुख्य सवाल और बिंदु उठते हैं:
- सुरक्षा प्रणालियों (Safety Devices) की विफलता: जब कोई हाई-वोल्टेज या एलटी लाइन टूटकर जमीन पर गिरती है, तो सर्किट ब्रेकर या ऑटो-ट्रिपिंग सिस्टम को तुरंत एक्टिव होकर बिजली की आपूर्ति बंद कर देनी चाहिए। यदि तार गिरने के बाद भी करंट दौड़ता रहा, तो यह विभाग के सुरक्षा उपकरणों के रखरखाव और उनकी गुणवत्ता पर बहुत बड़ा सवालिया निशान है।
- नियमित मेंटेनेंस और इंस्पेक्शन की कमी: जर्जर और ढीले तारों को समय पर न बदलना, पेड़ों की छंटाई न करना और नियमित निरीक्षण (Inspection) न करना विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
- उचित मुआवजा और सहायता: परिवार ने जो अपूरणीय क्षति सही है, उसकी भरपाई किसी भी चीज से नहीं हो सकती। लेकिन आर्थिक मदद और परिवार के किसी सदस्य को सरकारी/विभागीय नौकरी देना सरकार और ऊर्जा निगम का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है, ताकि पीड़ित परिवार का भविष्य संभल सके।
- जवाबदेही और सख्त कार्रवाई: केवल मुआवजे से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस घटना के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच कर उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई (FIR और निलंबन) होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जनता की सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना चाहिए।
