हिमगिरी न्यूज़ (खबर सच हैं)—अभी आंदोलन को टले 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि बेरोजगारों ने सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम दे दिया। अगर भर्ती रद्द नहीं हुई तो बेरोजगार फिर सड़कों पर उतरेंगे। मंगलवार को दून में हुई बैठक में बेरोजगार संघ ने यह रणनीति बनाई।

सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने धरनास्थल पर बेरोजगारों के बीच पहुंच हालिया स्नातक स्तरीय भर्ती की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी थी। उन्होंने कहा था कि एसआईटी की जांच में तथ्य आने के बाद कुछ ही दिन में पेपर भी निरस्त करवा दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि, बेरोजगारों से बातचीत में सरकार ने अपने स्तर से भर्ती रद्द ना कर पाने की असमर्थता जताई है। यह कहा जा रहा कि अगर रिटायर जज की जांच में भर्ती में गड़बड़ी आई तो ही भर्ती रद्द हो पाएगी। ऐसे में बेरोजगार आशंकित हैं। साथ ही, सीबीआई जांच होगी या नहीं, इसको लेकर भी आशंका है। ऐसेमें बेरोजगार आगे के आंदोलन के लिए खुद को और मजबूती से तैयार करने में जुट गए हैं। दून में हुई बैठक में इन तमाम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, आगे किस तरह और कितने स्तर पर आंदोलन करना है, यह भी तय किया गया है। इसके साथ ही अब तक हुए आंदोलन में अपनी ताकत और कमजोरी पर भी बेरोजगारों ने मंथन किया। इस बैठक में बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल, उपाध्यक्ष सुरेश कुमार आदि मौजूद रहे।

बेरोजगारों ने दून में बैठक की। यहां तय किया गया कि अगर 10 से 12 दिन में भर्ती रद्द नहीं होती और सीबीआई जांच का मामला आगे नहीं बढ़ता तो बेरोजगार फिर सड़कों पर उतरेगा। इस बार युवा आंदोलन में ज्यादा ताकत के साथ उतरेगा। यह सरकार भी जानती है। – राम कंडवाल,अध्यक्ष-उत्तराखंड बेरोजगार संघ

दून की विशेष बैठक में रूपरेखा तय, पहले से बड़ा होगा आंदोलन

 बेरोजगार आशंकित. संभावित आंदोलन के लिए तैयारी में जुटे

सीबीआई जांच को लेकर फैलाया जा रहा भ्रमः कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यूके ट्रिपलएससी के पेपर लीक में सरकार की ओर से सीबीआई जांच को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। यह जांच अभी सिर्फ संस्तुति भर है, सरकार सिफारिश केंद्र को भेजेगी और अंतिम निर्णय केंद्र ही लेगा। पार्टी प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि वर्ष 2017 में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री ने एनएच-74 घोटाले की सीबीआई जांच का ऐलान किया था, लेकिन नो साल बाद भी राज्य उस जांच की बाट जोह रहा है। दसौनी ने कहा कि भाजपा कथनी-करनी में अंतर से भरोसा खो हो चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परीक्षा तंत्र औंधे मुंह गिर चुका है तो इसमें जश्न मनाने जैसी बात क्या है।

 

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