हिमगिरि न्यूज देहरादून — उत्तराखंड में चार साल बाद धामी कैबिनेट का विस्तार हो गया है. उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह (रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल) नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. जिन विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई उनमें मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, भरत चौधरी, राम सिंह कैड़ा और खजानदास हैं.

धामी कैबिनेट का विस्तार: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन आज जहां मां ब्रह्मचारिणी की पूजा हो रही है तो वहीं उत्तराखंड की धामी कैबिेनट का विस्तार भी हो गया है. क्षेत्रीय और जातीय समीकरण के बीच संतुलन बनाते हुए पांच नए मंत्रियों को धामी कैबिनेट में आज शामिल किया गया है. दरअसल धामी कैबिनेट में 5 मंत्रियों के पद खाली थे. लंबे समय से इन पदों को भरने की अटकलें लगाई जाती रही थी. विधायक भी टकटकी लगाए मंत्री पद पाने की लालसा में 4 साल इंतजार करते रहे. आखिरकार 2026 के शारदीय नवरात्रि में उत्तराखंड बीजेपी के 5 विधायकों के मंत्री बनने का समय आ गया.
ये 5 विधायक बने मंत्री: धामी सरकार में रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट के विधायक भरत चौधरी को मंत्री बनाया गया है. देहरादून की राजपुर विधानसभा सीट के विधायक खजानदास को भी मंत्री पद मिला है.

इन विधायकों को भी मिला मंत्री पद: इनके साथ ही हरिद्वार जिले की रुड़की विधानसभा सीट से विधायक प्रदीप बत्रा और हरिद्वार सीट के विधायक मदन कौशिक मंत्री बने हैं. नैनीताल जिले की भीमताल सीट से विधायक राम सिंह कैड़ा को भी मंत्री बनाया गया है.
2027 में हैं उत्तराखंड विधानसभा चुनाव:अब चूंकि 2027 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव होने हैं तो इस मंत्रिमंडल विस्तार को क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि जिन पांच विधायकों को मंत्री पद के लिए चुना गया है, उनके पिछले चार साल के काम का रिकॉर्ड देखा गया है. जिनका रिकॉर्ड बेस्ट मिला है, उन्हें मंत्री बनाया गया है.

आस लगाये कही बिधायको को इस बार भी भाजपा ने कर दिया किनारा

देहरादून के कंही बिधायक व उनके समर्थक लगातार ये दावा करते आये हे कि अबकी बार जब भी मंत्री पदो का बिस्तार होगा तो उनका नाम आना तय हे सभी अपनी अपनी और से दावे कर रहे थे। कि इस बार पार्टी सबसे अधिक मतो से जीतने का लाभ रायपुर बिधायक काऊ को देगी । या दो बार देहरादून शहर के मेयर होने का फायदा बिधायक धर्मपुर बिधायक को मिल सकता हे साथ ही मुन्ना सिंह चौहान व उनके समर्थक भी आस लगाये बेठे थे कि अबकी बार चौहान को पार्टी जरूर मौका देगी । लेकि‍न पार्टी ने इनके इतर अपना फैसला दिया ओर जातीय क्षेत्रीय समीकरण को साधते हुये विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियो को सबसे पहले देखा । अब आने वाले समय मे पार्टी का फेसला सही हे या गलत ये तो समय ही बतायेगा लैकिन मंत्री पद की आस लगाये नेता व उनके समर्थको मे निरासा अवश्य देखी गयी । जो सोशल मिडिया के माध्यमों से उजागर भी हो रहा हे ।