
हिमगिरी न्यूज़ (खबर सच हैं) देहरादून— नगर निगम के सौ वाडों में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा गया है। ठेकेदार यूनियन के बहिष्कार के कारण सौ में से 33 वार्डों के ही निविदा फॉर्म की बिक्री हो पाई। ऐसे में नगर निगम के सामने टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की चुनौती है।
अध्यक्ष ठेकेदार एसोसिएशन नगर निगम मुकेश शर्मा ने बताया कि प्रशासक के कार्यकाल के दौरान जिलाधिकारी कैंप कार्यालय और तत्कालीन नगर आयुक्त के आवास में करीब 22 लाख रुपये की लागत से मरम्मत का काम हुआ था। कई माह बाद भी इसका भुगतान नहीं किया गया। एक ठेकेदार की फाइल ही नहीं मिल रही है। उनका कहना है कि अधिकारियों के कहने पर ही ठेकेदार जरूरत पड़ने पर एडवांस काम करते हैं। यदि भुगतान को लेकर यही स्थिति रही तो एडवांस काम कराने की आगे कोई उम्मीद नहीं रखें।
डीपीआर तैयार करने वाले कैसे डाल रहे टेंडर?
ठेकेदार यूनियन की इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि गांधी पार्क के सौंदर्याकरण की डीपीआर तैयार करने वालों ने इसी काम का टेंडर डाला। उनका कहना है कि कम से कम पांच करोड़ तक के कार्य स्थानीय ठेकेदारों को दिए जाएं ताकि उनके रोजगार पर कोई असर नहीं पड़े। इस टेंडर को लेकर निगम के पार्षदों ने भी मेयर के समक्ष बैठक में आपत्ति जताई थी।
