हिमगिरी न्यूज़ (खबर सच हे)—-हरेला उत्सव पेड़ लगाने का नहीं पेड़ बचाने की मुहिम होनी चाहिए वन और अन्य विभाग हर साल लाखों पेड़ लगाते हैं वह धरातल पर कितने जिंदा है वह सोचनी है विषय है

विकास के नाम पर जितनी तेजी से पेड़ कटते जा रहे हैं उनको बचाने की मुहिम चलाई जानी चाहिए हरेले का उत्सव तभी सार्थक होगा###
प•लीलानंद
की प्रेरणादाई कहानी
*** एक मूक पर्यावरण प्रेमी को नमन ***
जब पहाड़ों पर कोई मोटर मार्ग नही था तो लोग पैदल और घोड़ों से ही यात्रा और आवश्यक सामान ले जाते थे ।।
उस समय दुगड्डा गुमखाल रैतपुर उखलेत सतपुली से एकेशवर; पोखडा ,थैलीसैण,पाबौ;गैरसैण एवं बीरोंखाल विकास खंडो के लिए एक ही पैदल मार्ग था जिसके द्वारा ढकरी आना जाना करते थे ।।
यह मार्ग काफी चढ़ाई वाला था और रास्ते में न पानी था न कोई छाया वाले पेड़ ।।।
गाँव बंठोली के लीलानंद जी निसंतान थे उनके द्वारा इस जगह पर दो पीपल के पेड़ लगाऐ और कई सालों तक तीन किलो मीटर खड़ी चढ़ाई पर नियमित पानी लाकर इन पीपल के पेड़ों को जिंदा किया ।।
आज लीलानंद जी हमारे बीच नही है लेकिन 150 साल से अधिक समय पहले उनके लगाऐ यह पीपल के जुड़वे पेड़ आज भी आने जाने वाले मुसाफिरो के लिए सुंदर आशियाने बने हैं
लीलानंद जी की उस सोच को नमन ।

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