रुद्रप्रयाग: अगस्त्यमुनि महाराज की डोली ने हजारों भक्तों के साथ अगस्त्यमुनि मैदान में प्रवेश कर लिया है. इससे पहले आक्रोशित भक्तों ने गोल गेट को तोड़ दिया. इस गेट को तोड़ने में भक्तों को करीब साढ़े तीन घंटे का समय लग गया. इस दौरान आक्रोशित भीड़ की पुलिस के साथ नोकझोंक भी हुई. वहीं, गेट तोड़ने और माहौल खराब करने के मामले में 52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है.

क्या है मामला? बता दें कि केदारघाटी के अगस्त्यमुनि में प्रसिद्ध अगस्त्य मंदिर में मुनि महाराज विराजते हैं. यहां अगस्त्य या अगस्तमुनि महाराज के नाम पर खेल मैदान है. जहां पर प्रशासन की ओर से स्टेडियम निर्माण करवाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीण नहीं चाहते कि इस स्थान पर स्टेडियम का निर्माण किया जाए

उनका कहना है कि ये खेल मैदान मुनि महाराज का है, जहां पर बच्चों को खेलने कूदने में आसानी होती है. अगर यहां स्टेडियम का निर्माण किया जाता है तो यहां के लोगों को बाहरी लोगों के हाथों की कठपुतली बनना पड़ेगा. ऐसे में स्टेडियम निर्माण के विरोध में बीते एक महीने से खेल मैदान में मुनि महाराज की गद्दीस्थल के पास ग्रामीण धरने पर बैठे हुए हैं.

15 साल बाद दिवारा यात्रा का आयोजन: ग्रामीणों ने इस बार 15 साल बाद अगस्त्यमुनि महाराज की डोली दिवारा यात्रा का आयोजन किया है, जिसके तहत मकर संक्रांति के पर्व पर अगस्त्य मंदिर से मुनि महाराज की डोली को खेल मैदान मेंं स्थित गद्दीस्थल पर जाना था, लेकिन खेल मैदान का गेट गोल आकार का होने के चलते डोली अंदर को प्रवेश नहीं कर पाई.

ऐसे में ग्रामीणों ने मकर संक्रांति पर्व पर यानी 14 जनवरी को करीब पांच घंटे तक केदारनाथ हाईवे पर गोल गेट को तोड़े जाने की मांग की, लेकिन गेट नहीं तोड़े जाने पर डोली वापस मंदिर को लौटी. इस दौरान केदारनाथ हाईवे पर जाम लग गया था. जिसमें वाहन घंटों तक फंसे रहे. जिससे यात्रियों से लेकर अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा.

वहीं, गुरुवार यानी 15 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे डोली ने दोबारे अगस्त्यमुनि खेल मैदान में अपने गद्दीस्थल के लिए प्रस्थान किया. रास्ते में गोल गेट टूटा न मिलने पर मुनि महाराज के सेवक और श्रद्धालु आक्रोशित हो गए. मेन गेट तोड़ने को लेकर सवा 12 बजे के आसपास लोगों ने प्रयास शुरू किया. लगातार कई घंटे तक प्रयास के बाद करीब शाम चार बजे श्रद्धालु गेट तोड़ने में सफल रहे.

इसके बाद मुनि महाराज की डोली अपने नेजा-निशानों के साथ अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल के लिए रवाना हुई. डोली के अगस्त्यमुनि क्रीड़ा मैदान पहुंचने पर हजारों श्रद्धालु वहां जमा हो गए. सबसे पहले डोली ने स्टेडियम निर्माण स्थल पर पहुंचकर कुछ देर तक नृत्य किया. इसके बाद डोली गद्दीस्थल में विराजमान हुई, जहां मुनि महाराज के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा. यहां पुजारियों ने मुनि महाराज को भोग भी लगाया.

साल 2004 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष के हस्ताक्षर से मुनि महाराज की भूमि को खेल विभाग को हस्तांतरित किया गया था, जिसके कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं. यह भूमि पिछले करीब पांच दशकों से मुनि महाराज की रही है. प्रशासन को हठधर्मिता छोड़नी होगी. अन्यथा इससे बड़ी आपदा की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.“- त्रिभुवन चौहान, सामाजिक कार्यकर्ता

गेट तोड़ने वालों की पहचान में जुटा प्रशासन: वहीं, एसडीएम एसएस सैनी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के बगल से कोई गोल गेट नहीं था और डोली संचालन समिति के पदाधिकारियों से वैकल्पिक मार्ग से जाने को कहा गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित लोग मामले को अनावश्यक रूप से तूल देकर अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास कर रहे हैं. ड्रोन कैमरों के माध्यम से गेट तोड़ने वालों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

धार्मिक भावनाओं की आड़ में कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं. जिन लोगों ने गेट तोड़ने का काम किया है, उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा, जिसमें गुंडा एक्ट भी शामिल रहेगा.“- प्रतीक जैन, डीएम, रुद्रप्रयाग

52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज: डीएम प्रतीक जैन ने अगस्त्यमुनि महाराज की देवरा यात्रा के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान, प्रशासनिक अधिकारियों से अभद्र व्यवहार और राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध करने के साथ ही कुछ ‘रिपेटिटिव ऑफेंडर्स’ के खिलाफ गुंडा एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए. जिस पर अब त्रिभुवन चौहान, अनिल बैजवाल, राजेश बैजवाल समेत 52 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 127, धारा 191(2), धारा 61, धारा 285 के साथ लोक संपत्ति को नुकसानी का निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा-

  1. त्रिभुवन चौहान पुत्र कुलदीप सिह, निवासी- देवर, गुप्तकाशी, रुद्रप्रयाग
  2. अनिल बैजवाल पुत्र चक्रधर बैजवाल, निवासी- नाकोट, अगस्त्यमुनि
  3. राजेश बैजवाल पुत्र भगवती प्रसाद, निवासी- नाकोट, अगस्त्यमुनि
  4. योगेश बैजवाल पुत्र अनुसुइया प्रसाद बैजवाल, निवासी- नाकोट, अगस्त्यमुनि
  5. शेखर नौटियाल पुत्र अनुसुइया प्रसाद नौटियाल, निवासी- सिल्ला बामण गांव अगस्त्यमुनि
  6. भानु चमोला पुत्र अज्ञात, निवासी- तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि
  7. मिथुन सब्जी वाला, निवासी- अगस्त्यमुनि
  8. मकर लाल पुत्र अज्ञात, निवासी- फलई, अगस्त्यमुनि
  9. हैप्पी असवाल पुत्र अज्ञात, निवासी- तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि
  10. विपिन रावत पुत्र अज्ञात, निवासी- जखन्याल गांव, अगस्त्यमुनि
  11. केशव अग्रवाल पुत्र अज्ञात, निवासी- जखन्याल गांव, अगस्त्यमुनि
  12. प्रियाशु मोहन पुत्र अज्ञात, निवासी- तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि समेत 40 अन्य लोग

वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि कुछ अराजक तत्वों ने धार्मिक परंपरा की आड़ लेकर जानबूझकर अव्यवस्था उत्पन्न करने का प्रयास किया. इन तत्वों ने क्रीड़ा भवन के मुख्य द्वार को तोड़ दिया, जिससे न केवल सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंची, बल्कि नेशनल हाईवे 107 पर तीन से चार घंटे तक आवागमन बाधित रहा. डीएम ने साफतौर पर कहा कि धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता, हिंसा या अव्यवस्था को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जिले के शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा.