हिमगिरि न्यूज़ —–मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को पहली बार शंकराचार्य विवाद पर चुप्पी तोड़ी। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान योगी ने कहा कि हर कोई व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता है।
योगी ने कहा कि विद्वत परिषद के प्रमाण से ही व्यक्ति शंकराचार्य होता है। क्या कोई भी मुख्यमंत्री के तौर पर पूरे प्रदेश में घूम सकता है या मंत्री बनकर घूम सकता है। करीब 2.13 घंटे के संबोधन में मुख्यमंत्री ने सपा और कांग्रेस पर लगातार तंज कसे।
योगी ने कहा कि शंकराचार्य सनातन का सर्वोच्च पद है। प्रयागराज में माध मेला था, मौनी अमावस्या के दिन साढ़े चार करोड़ बद्धालु थे, कानून सबके लिए बराबर हैं। कोई भी उससे ऊपर नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री भी नहीं। आदि शंकराचार्थ ने चार पीठ स्थापित की थीं। वेदों के ज्ञान के आधार पर विद्वत परिषद के प्रमाण से व्यक्ति शंकराचार्य होता है। मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा। योगी ने कहा कि यह शंकराचार्य हैं तो आपने (सपा सरकार) ने वर्ष 2015 में उन्हें क्यों पीटा था? एफआईआर क्यों कराई थी। निकासी द्वार जहां से श्रद्धालुओं को निकलना था, वहां खड़े होना भगदड़ की दावत थी।

लखनऊ में शुक्रवार को विधानसभा में चर्चा का जवाब दते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

हम मर्यादित है। कानून का पालन करना और करवाना जानते हैं। समाजवादी पार्टी हर मसले पर जनता को गुमराह करना बंद करे। सभी को कानून का पालन करना होगा।
– योगी आदित्यनाथ, मुखामंत्री, यूपी

