अतीत के आईने से हिमगिरी न्यूज़–(खबर सच हैं)—-पाटीसैण (पौड़ी): एक ओर चुनाव जहां गांव-मोहल्ला ही नहीं, परिवारों में भी दरार डाल देते हैं, वहीं पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लाक की एक ग्राम पंचायत ऐसी भी है, जो पिछले 35 वर्षों से लोकतंत्र की आदर्श परंपरा निर्वाह करते हुए निर्विरोध अपना प्रधान चुन रही है। यह सब कैसे हुआ, इसके पीछे की कहानी बड़ी रोचक है। दरअसल, पहले ग्राम पंचायत बमोली में भी चुनाव होते थे। लेकिन, वर्ष 1985 के चुनाव में मतदान के दौरान ग्रामीणों के बीच मारपीट हो गई। इसमें मतदानकर्मी भी घायल हुए। इस घटना से ग्रामीण इस कदर आहत हुएकि ग्रामवासियो नें तब से अब तक अपने गाँव में प्रधान ओर पंच के चुनाव नही होने दिए।
35 पंचायत बमोली में निर्विरोध हो रहा प्रधान व पंचों का चुनाव
पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लाक का ग्राम बमोली। यहां पिछले चार दशक से ग्राम प्रधान का
चयन निर्विरोध होता आ रहा है
बारी-बारी से इस गांव का व्यक्ति/महिला प्रधान चुना जाएगा, ताकि किसी तरह का द्वेषभाव न पनपे। बस । तब से निर्विरोध प्रधान चुनने की यह परंपरा निर्वाध चली आ रही है।
बमोली निवासी रामकृष्ण चतुर्वेदी बताते हैं कि वर्ष 1960 से वर्ष 1976 तक ग्राम पंचायत बमोली का मतदान केंद्र प्रावि ग्वाड़ तल्ला में हुआ करता था। तब ग्राम पंचायत की आबादी 700 के आसपास थी। वर्ष 1976 में बमोली को न्याय पंचायत का दर्जा भी मिल गया। इसके बाद ग्वाड़ तल्ला से मतदान केंद्र बदलकर प्रा0 बिद्यालय बमोली कर दिया गया। क्षेत्र के लोगों ने बमोली को न्याय पंचायत का दर्जा मिलने पर सकिंडा को अलग ग्राम पंचायत बनाने की मांग रखी, लेकिन बात नहीं बनी। ग्राम पंचायत बमोली में सकिंडा व नौदेणा भी शामिल हैं। हालांकि, तोक गांव नौदेणा के लोग मूलरूप से ग्राम पंचायत में मतदान के दौरान 1985 मारपीट हो जाने से आहत ग्रामीणों ने लिया था यह निर्णय
ग्राम बमोली के लोग ग्वाड़ तल्ला के बाशिंदे हैं। लेकिन, वर्ष 1966 में नौदेणा के दो-तीन परिवार ग्वाड़ तल्ला से बमोली शिफ्ट हो गए और वहीं अपने आवास भी बना दिए। वर्तमान में नौदेणा में 10-12 परिवार रहते हैं। पलायन के चलते ग्राम पंचायत में अब लगभग 80 परिवार रह गए हैं, जबकि मतदाताओं की संख्या 130 है।वर्ष 2019 में यहां प्रधान का पद आरक्षित किया गया था, लेकिन मानकों के अनुरूप पद के लिए अर्ह शैक्षिक योग्यता न होने के कारण यह पद खाली रहा। इस बार सीट सामान्य हुई तो नौदेणा के ओमप्रकाश सिंह निर्विरोध प्रधान चुने गए हैं। 76-वर्षीय यशवंत सिंह (नौदेणा) व 86-वर्षीय माणिकलाल चतुर्वेदी बताते हैं कि ग्राम पंचायत में पंच भी सर्वसम्मति से चुने जाते हैं। वर्ष 1985 के बाद से तीनों गांवों के लोग लोकतंत्र की इस आदर्श परंपरा को निभा रहे हैं।इसके चलते बिना खर्चे और प्रचार-प्रसार के चुनाव संपन्न हो जाता है। साथ ही लोगों च किसी तरह का वैर-भाव भी नहीं रहता।

